दूध उत्पादन बढ़ाने के नाम पर मिलावटी पशुखाद्य पर कार्रवाई तेज

दूध उत्पादन बढ़ाने के नाम पर बाजार में कुछ स्थानों पर निम्न गुणवत्ता वाले घटकों को मिलाकर तैयार की गई पशु-आहार (गोली पेंडी) की बिक्री होने की शिकायतें सामने आई हैं। इस पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में पशु-आहार के नमूने लेकर जांच अभियान को और अधिक सख्ती से चलाया जा रहा है, जिससे पंजीकृत और विश्वसनीय ब्रांडों की बाजार में मांग बढ़ रही है।
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अभियान का मुख्य उद्देश्य: दूध और दुग्ध उत्पादों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता लाना तथा मिलावट पर रोक लगाना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। दूध की गुणवत्ता से समझौता करने वालों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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मिलावट का खुलासा: जांच के दौरान यह सामने आया है कि कुछ स्थानों पर नकली दूध बनाने के लिए डिटर्जेंट, पाम ऑयल, रसायनों और निम्न गुणवत्ता वाले दूध पाउडर का उपयोग किया जा रहा है। कई मामलों में यह दूध पाउडर ‘पशु-आहार’ के नाम पर खरीदा जाता है और बाद में उसका दुरुपयोग किया जाता है।
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व्यापक कार्रवाई: इस अभियान के तहत पुणे, अहिल्यानगर (अहमदनगर), सोलापुर, जालना और ठाणे जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर छापेमारी की गई है। प्रशासन ने अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है तथा अनेक खाद्य लाइसेंस निलंबित किए हैं।
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कड़े दंड और नियम: खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों पर 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। दूध संग्रह केंद्रों से लेकर खुदरा विक्रेताओं तक सभी के लिए अब सख्त नियमों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है।
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गुणवत्ता को प्राथमिकता: इस अभियान के बाद बाजार में पंजीकृत, प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले पशु-आहार एवं डेयरी उत्पाद ब्रांडों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। Top of Form
Source : https://fda.maharashtra.gov.in/
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