शीरे (Molasses) से प्राकृतिक और सस्ता पूरक पशु आहार बनाने में तेजी

महाराष्ट्र के गन्ना बेल्ट (विशेष रूप से कोल्हापुर, अहमदनगर और सोलापुर) में गन्ने की शीरे (Sugarcane Molasses) पर आधारित पूरक पशु आहार बनाने की तकनीक का उपयोग बढ़ गया है। यह पशु आहार जानवरों के लिए पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक है और बाजार में मिलने वाले महंगे कमर्शियल चारे के एक सस्ते और प्राकृतिक विकल्प के रूप में उभर रहा है।
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क्षेत्र का विस्तार: महाराष्ट्र राज्य के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों जैसे कोल्हापुर, अहमदनगर (अहिल्यानगर) और सोलापुर जिलों में शीरे पर आधारित पशु आहार तैयार करने वाली इकाइयों की संख्या बढ़ रही है।
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उत्पाद का स्वरूप: चीनी मिलों से निकलने वाली शीरे (Molasses) का उपयोग करके यह पूरक पशु आहार (Supplementary Animal Feed) तैयार किया जा रहा है। यह चारा प्राकृतिक है और जानवरों को आवश्यक ऊर्जा व पोषक तत्व प्रदान करता है, इसलिए इसे काफी पसंद किया जा रहा है।
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आर्थिक महत्व: बाजार में उपलब्ध महंगे कमर्शियल पशु आहार की तुलना में यह उत्पाद अत्यंत सस्ता और किफायती है। दुग्ध उत्पादकों के लिए यह उत्पादन लागत कम करने का एक प्रभावी विकल्प साबित हो रहा है।
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वर्तमान स्थिति: इस तकनीक के कारण चीनी मिलों के उप-उत्पादों (By-products) का पुनर्चक्रण (Reuse) हो रहा है, जिससे एक स्थायी ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ मॉडल विकसित हो रहा है। डेयरी फार्मों में इस चारे का उपयोग बढ़ने से स्थानीय स्तर पर पशु आहार की उपलब्धता में सुधार हुआ है।
Source : https://www.feedipedia.org/node/561
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