‘लो-टेम्परेचर पल्वराइज़र’ (Low-Temperature Milling) तकनीक का बढ़ता उपयोग

पारंपरिक चक्की में बेसन पीसते समय उत्पन्न होने वाली गर्मी के कारण आटे में मौजूद पोषक तत्व और प्राकृतिक सुगंध कम हो जाती है। इस समस्या से बचने के लिए बेसन निर्माता अब अत्याधुनिक ‘लो-टेम्परेचर पिन मिल’ (Pin Mills) और ऑटोमैटिक पल्वराइज़र मशीनरी का उपयोग कर रहे हैं, जिससे बेसन का आकर्षक पीला रंग, प्रोटीन और प्राकृतिक स्वाद लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।
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पारंपरिक चक्की में गर्मी की समस्या: पारंपरिक चक्की में बेसन पीसने के दौरान उत्पन्न अधिक गर्मी (Heat) के कारण आटे में मौजूद महत्वपूर्ण पोषक तत्व और प्राकृतिक सुगंध नष्ट हो जाते हैं।
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अत्याधुनिक मशीनरी का उपयोग: इस समस्या को रोकने के लिए बेसन निर्माता अब अत्याधुनिक ‘लो-टेम्परेचर पिन मिल’ (Pin Mills) और ऑटोमैटिक पल्वराइज़र मशीनरी का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहे हैं।
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गुणवत्ता और पौष्टिकता बरकरार: इस उन्नत तकनीक की मदद से बेसन का आकर्षक पीला रंग, उसमें मौजूद प्रोटीन तथा उसका प्राकृतिक स्वाद बेहतर तरीके से सुरक्षित रहता है।
Soure : https://www.fssai.gov.in/
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